covid 19

न हिन्दू शामिल है इसमें,न मुस्लिम का हाथ है,
सिख,ईसाई,बौद्ध, जैन सब यहां साथ है।

फर्क सिर्फ इतना पता है कुछ की ही ये ख़ता है।

हालात बदतर थे न ठीक होने के कगार पर थे,
मन्नतें थीं मंदिरों में,दुआओं में कुछ मजार पर थे।

शुक्र मना ऐ इंसान तुझे जिंदगी दूसरी मिली है,
हां मगर ये भी मान ये तेरी बुज़दिली है।

हौंसला उनका क़ाबिले-तारीफ़,जो जद्दोजहद में रहे, 
छोड़कर परिवार अपना सिर्फ हद में रहे।

अब भी वक़्त बाकी है दुनिया को बदलने का,
बस ये वक्त तो है, हां मगर वादा कर साथ चलने का।

रिवाज कुछ पुराना साथ ले,इरादे अपने नेक कर ले,
हां,बशर्ते काम अच्छा हो,चाहे एक कर ले।

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