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Showing posts from October, 2020

पास आने की कोशिशें

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पास आने की कोशिशें जारी रख, यूं इस तरह मुझे खुद से दूर न कर। चाहते बेशुमार की हैं पूछ अपने दिल से कभी, टूट तो चुकी हूं और चूर चूर न कर। हां प्यार का कुछ हिस्सा ही कुबूल है हमें, वो भी चाहे भरपूर न कर। अरे इतना भी जज्बाती नहीं हम, ये नासमझी तो हुजूर न कर।

दरीचे से

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जरा सी रोशनी आती है दरीचे से, अक्सर जब हम तन्हा होते हैं दोपहर में कभी। एक उम्मीद तेरे आने की आज भी बरकरार है, जरा आ कभी पीने चाय हमारे शहर में कभी।

रूबरू

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वक्त होगा तो होंगे कभी रूबरू, अभी कोई वजह नहीं है। फुर्सत में मिलेंगे रेस्तरां में कहीं, घर छोटा है हमारा इतनी जगह नहीं है।

आगाज तो कर

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Open for read निकल बाहर आशियाने से,तूं आगाज तो कर, धीरे बोल कुछ तो सही,तूं आवाज़ तो कर। सुना है खुशमिजाज है जिंदगी में तूं, कभी रूठकर, टूटकर, यह भी अंदाज तो कर। डरकर जीना भी कोई जिंदगी की मिसाल नहीं, पानी में डूबकर निकल,ख़ुद को जांबाज तो कर। वक्त को वक्त मिला, तुझे भी देगा मोहलत कभी, वक्त के पहिये सा, पहले मिज़ाज तो कर। तुझे तोड़ा जाएगा,पुराने मकान की तरह, उसी पुरानी ईंट से जुड़कर नया रिवाज तो कर। कल करने की सोच रहा है जिस काम को तूं, क्यों न उसे...... क्यों न उसे,अभी और आज तूं कर।

रिश्ते

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 रिश्ते अनजाने से हैं  तो क्या हुआ, किसी बहाने से पास रहने दो। इक दिल की अमीरी काफी है निभाने के लिए, यही अनछुए से अहसास रहने दो।

नासमझ

जैसा जिसने चाहा, उसी सांचे में ढल गया। नासमझ था वो मिट्टी की तरह, जरा सा पानी के नजदीक आया  और गल गया।