आगाज तो कर

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निकल बाहर आशियाने से,तूं आगाज तो कर,
धीरे बोल कुछ तो सही,तूं आवाज़ तो कर।

सुना है खुशमिजाज है जिंदगी में तूं,
कभी रूठकर, टूटकर, यह भी अंदाज तो कर।

डरकर जीना भी कोई जिंदगी की मिसाल नहीं,
पानी में डूबकर निकल,ख़ुद को जांबाज तो कर।

वक्त को वक्त मिला, तुझे भी देगा मोहलत कभी,
वक्त के पहिये सा, पहले मिज़ाज तो कर।

तुझे तोड़ा जाएगा,पुराने मकान की तरह,
उसी पुरानी ईंट से जुड़कर नया रिवाज तो कर।

कल करने की सोच रहा है जिस काम को तूं,

क्यों न उसे......

क्यों न उसे,अभी और आज तूं कर।

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