शीशे सी तासीर

शीशे सी तासीर मत बना,पत्थर की तरह भी पेश 
आ ज़रा।
नदियों सा बहता चल,वक़्त आने पर समंदर सा होगा भरा।
कौन कहता है जमीं बंजर है यहां, कभी तो था यहां भी खेत हरा।
तालीम कुछ बुरा वक्त भी देता है, यूं ही नही बनता कोई हीरे सा खरा।

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